Saturday, January 7, 2012

ये बूंदें नमक सी लगती हैं, कल के घावों पर गिरती हैं, बारिश कुछ भी कर सकती है, गुजरा कल लौटा सकती है, ऐसी ही एक बारिश में, कुछ बातें भीग गई थीं, धूप का दावा जो भी हो, वे बातें अब भी गीली हैं, विष अब भी बेहद गहरा है, मेरी पलकें भी नीली हैं।

ये बूंदें नमक सी लगती हैं,
कल के घावों पर गिरती हैं,
बारिश कुछ भी कर सकती है,
गुजरा कल लौटा सकती है,
ऐसी ही एक बारिश में,
कुछ बातें भीग गई थीं,
धूप का दावा जो भी हो,
वे बातें अब भी गीली हैं,
ये बूंदें नमक सी लगती हैं,
कल के घावों पर गिरती हैं,
बारिश कुछ भी कर सकती है,
गुजरा कल लौटा सकती है,
ऐसी ही एक बारिश में,
कुछ बातें भीग गई थीं,
धूप का दावा जो भी हो,
वे बातें अब भी गीली हैं,
विष अब भी बेहद गहरा है,
मेरी पलकें भी नीली हैं।  अब भी बेहद गहरा है,
मेरी पलकें भी नीली हैं।..................................

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