जब बेखुदी की नसों में डूबता है
तुम्हारे अहसास का सूरज
जब होश की सरहदों में घुमड़ता है
तुम्हारे वजूद का नशा........................... ..........
तुम्हारे अहसास का सूरज
जब होश की सरहदों में घुमड़ता है
तुम्हारे वजूद का नशा...........................
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