Saturday, January 7, 2012

इंतजार

तुमसे एक वादा था
तुम कहीं भी रहोगी
मुझे जानोगी
मुझे कुछ ऐसा करना होगा
तुम जान सको मेरे बारे में, बगैर कोशिश के
सब वैसा ही हुआ
जैसा तुमने चाहा था
मैने निभा दिया अपना वादा
अब बारी तुम्हारी है
टूटने की आखिरी हद तक
इंतजार रहेगा
तुम आओ
एक बार फिर
ताकि
मेरी टूटन पर
आखिरी मुहर तुम्हारी हो

ज्वार

ये उमस अब ठंडी हो चुकी है,
तुम्हारी याद की शबनम में घुलकर
सो चुकी है।
सोने दो, इसे अब मत जगाओ
ये झेलम की नदी खामोश है
मत ज्वार लाओ।
कहीं ऐसा न हो जाए, किनारे टूट जाएं
पीपल के साए में किए वादे कभी
आंख के मोती में बहकर फूट जाएं।

नव वर्ष 2012 की शुभकामनाएं

नव वर्ष 2012 की शुभकामनाएं

दूर देश से आने वाले,
दूर देश तक जाने वाले।
तम को दूर मिटाने वाले,
... ... नव वर्ष में जगाने वाले।

हिल मिल स्वागत करें सभी,
दो हजार बारह तुम आओ।
जीवन तम को दूर करो तुम ।
पुनः प्रकाशमय कर जाओे।

जीवन पथ पर, कर्मश्रेष्ठ हो,
उज्ज्वल कीर्ति, कान्ति कर दे ।
नवागन्तुक वर्ष तू आकर ,
जीवन में कुछ ऐसा कर दे।

‘‘मौन ’’कामना करता है यह,
हर्षोल्सित जीवन पथ होगा,
चहुओर कान्ति ,तुम्हारी होगी।
जब नव वर्ष का आगमन होगा।

सांस की तुरपन

दुख की एक गंगा है मेरे पास
और बहुत रेत है तुम्हारे सुख के तटों पर
इसी रेत की छांव में सूखा वक्त
आज भी उम्मीद से है
कि रेत से मिलेगी गंगा
और धुल जाएंगे पुराने जख्मों के निशां
समय बनाएगा कोई नया मकां
मगर सांस की तुरपन के टूटते टांके
और सफर के हाथ से छूटती सांकल
गवाह है
कि तुम्हारे बगैर पकी लम्हों की फसल
अपनी उपज में बिल्कुल तुम सी है
तुम सी ठहरी है फिर भी चलती है
वक्त के आगे बिखर गई सी है....

कर्ज

मुझे शुक्रिया करना है 
तुम्हारे होंठ से लिपटी नदी का 
जिसके पानियों ने अब तक जिंदा रखी 
मेरे वजूद की प्यास 
मुझ पर कर्ज है ........................................................

बेखुदी

तकलीफ का कोई अंत नहीं 
फिर भी
जब दिल के गोशों से गुजरती है
तुम्हें खोने की याद
जब आंख के कोनो में टूटता है
तुम्हारे होने का अक्स
जब बेखुदी की नसों में डूबता है
तुम्हारे अहसास का सूरज
जब होश की सरहदों में घुमड़ता है
तुम्हारे वजूद का नशा
जब कुछ नहीं का मानी होता है
बहुत कुछ
और बहुत कुछ होता है
कुछ भी हुए बगैर
जब उम्मीद की सिलों पर
नाउम्मीदी पीसती है
बीती यादों का दुख
और
समय की रेत पर धसक जाता है
तुम्हारे दुख का सुख
जब गले तक भरकर टूट जाता है
तकलीफ का बांध
वक्त के उस दौर में
जब वक्त ही नहीं होता
तकलीफ को आराम होता है.........

बेखुदी

जब बेखुदी की नसों में डूबता है
तुम्हारे अहसास का सूरज
जब होश की सरहदों में घुमड़ता है
तुम्हारे वजूद का नशा.....................................