Wednesday, February 8, 2012

पाकिस्तान की मशहूर शायरा परवीन शाकिर की कलम से

पाकिस्तान की मशहूर शायरा परवीन शाकिर की कलम से। महज 42 साल की जिंदगी और इतना कुछ कि "जिंदगी" लफ्ज ही छोटा पड़ जाए..... 

पूरा दुःख और आधा चाँद 
हिज्र की शब् और ऐसा चाँद

इतने घने बादल के पीछे
कितना तनहा होगा चाँद

मेरी करवट पर जाग उठे
नींद का कितना कच्चा चांद

सहरा सहरा भटक रहा है
अपने इश्क़ में सच्चा चांद

रात के शायद एक बजे हैं
सोता होगा मेरा चाँद

...........

इस लम्हा---

Pura Dukh Aur Aadha Chaand
Hijr Ki Shab Aur Aisa Chaand

Itne Ghane Baadal Ke Piche
Kitna Tanha Hoga Chaand

Meri Karvat Par Jaag Uthe
Neend Ka Kitna Kachcha Chaand

Sehra Sehra Bhatak Raha Hai
Apne Ishq Main Sachcha Chaand

Raat Ke Shayad Ek Baje Hain
Sota Hoga Mera Chaand

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