तू जो बेजान खिलोनों से बहल जाती है
तपती साँसों की हरारत से पिघल जाती है
पाँव जिस राह में रखती है फिसल जाती है
बनके सीमाब हर इक जर्फ में ढल जाती है
जिस्त के आहनी साँचे में ढलना है तुझे
उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे
तपती साँसों की हरारत से पिघल जाती है
पाँव जिस राह में रखती है फिसल जाती है
बनके सीमाब हर इक जर्फ में ढल जाती है
जिस्त के आहनी साँचे में ढलना है तुझे
उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे
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