दूब के कोमल तिनकोँ पर
मखमली ओस की
बूंदोँ की तरह
फैली है आज भी
मन के आंगन मेँ
मखमली ओस की
बूंदोँ की तरह
फैली है आज भी
मन के आंगन मेँ
तेरे एहसास की खुश्बू,
¤
तेरे संग
बिताये लम्होँ की एक किरण
चली आती है
चुपके से मेँरे पास
जैसे कोई भँबरा
फूलोँ के इर्द-गिर्द
मंडराता है
तेरा एहसास भी
घेर लेता है
मुझे
अपनी परछाइयोँ के बीच(दरमियां)
¤
तन्हाई की दहलीज पर
जैसे
ठण्डा,मंद हवा का
कोई एक झोँका
भर देता है
तन मेँ सिहरन,
¤
तेरा एहसास भी
दिल के हर कोने मेँ
अपनी
अमिट छाप छोड़ जाता है
फूलोँ मेँ निहित खुश्बू की तरह
मेँरे भीतर
आज भी जिन्दा है..एहसास तेरा!
¤
तेरे संग
बिताये लम्होँ की एक किरण
चली आती है
चुपके से मेँरे पास
जैसे कोई भँबरा
फूलोँ के इर्द-गिर्द
मंडराता है
तेरा एहसास भी
घेर लेता है
मुझे
अपनी परछाइयोँ के बीच(दरमियां)
¤
तन्हाई की दहलीज पर
जैसे
ठण्डा,मंद हवा का
कोई एक झोँका
भर देता है
तन मेँ सिहरन,
¤
तेरा एहसास भी
दिल के हर कोने मेँ
अपनी
अमिट छाप छोड़ जाता है
फूलोँ मेँ निहित खुश्बू की तरह
मेँरे भीतर
आज भी जिन्दा है..एहसास तेरा!
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