अश्क का साथ छूटा
तो आंखे उदास थीं
और
तुमसे बहुत नाराज भी
तुमने छीन जो ली थी
उनकी अमानत सब
अगर लौटा सको
तो देर मत करना
कि आंख की जमीन
अब भी सूखी है
और
अश्क की तो जात पर ही
आफत है
गुनाह था
जी भर के देखने का महज
तुमने तो बारिश चुरा ली आंखों से.........
तो आंखे उदास थीं
और
तुमसे बहुत नाराज भी
तुमने छीन जो ली थी
उनकी अमानत सब
अगर लौटा सको
तो देर मत करना
कि आंख की जमीन
अब भी सूखी है
और
अश्क की तो जात पर ही
आफत है
गुनाह था
जी भर के देखने का महज
तुमने तो बारिश चुरा ली आंखों से.........
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